Header

Showing posts with label अनसुनी करके तेरी बात. Show all posts
Showing posts with label अनसुनी करके तेरी बात. Show all posts

अनसुनी करके तेरी बात

अनसुनी करके तेरी बात
न दे जो कोई तेरा साथ
तो तुही कसकर अपनी कमर
अकेला बढ़ चल आगे रे--
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

देखकर तुझे मिलन की बेर
सभी जो लें अपने मुख फेर
न दो बातें भी कोई क रे
सभय हो तेरे आगे रे--
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

तो अकेला ही तू जी खोल
सुरीले मन मुरली के बोल
अकेला गा, अकेला सुन ।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला ही चल आगे रे ।

जायँ जो तुझे अकेला छोड़
न देखें मुड़कर तेरी ओर
बोझ ले अपना जब बढ़ चले
गहन पथ में तू आगे रे--
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

तो तुही पथ के कण्टक क्रूर
अकेला कर भय-संशय दूर
पैर के छालों से कर चूर ।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला ही चल आगे रे ।

और सुन तेरी करुण पुकार
अंधेरी पावस-निशि में द्वार
न खोलें ही न दिखावें दीप
न कोई भी जो जागे रे-
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

तो तुही वज्रानल में हाल
जलाकर अपना उर-कंकाल
अकेला जलता रह चिर काल ।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला बढ़ चल आगे रे ।

।।न मातुः परदैवतम्।।

Trust again!?❤️‍🩹

Taqdeer ne chaha jaise dhal gye hum Bahut sambhal kar chale phir bhi fisal gye hum Kisi ne bhrosa toda kisi ne dil.. Aur logo ko lagta hai z...