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मेरा शीश नवा दो अपनी (गीतांजलि)

मेरा शीश नवा दो अपनी (गीतांजलि)


मेरा शीश नवा दो अपनी
चरण-धूल के तल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।
अपने को गौरव देने को
अपमानित करता अपने को,
घेर स्वयं को घूम-घूम कर
मरता हूं पल-पल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।
अपने कामों में न करूं मैं
आत्म-प्रचार प्रभो;
अपनी ही इच्छा मेरे
जीवन में पूर्ण करो।
मुझको अपनी चरम शांति दो
प्राणों में वह परम कांति हो
आप खड़े हो मुझे ओट दें
हृदय-कमल के दल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब
मेरे आँसू-जल में।

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।।न मातुः परदैवतम्।।

ये नज़र नज़र की बात है ... 🥀

  ये नज़र नज़र की बात है किसे क्या तलाश है ,  तू हसने को बेताब हैं मुझे तेरी मुस्कुराहटों की प्यास है